Thursday, February 5, 2026

Padyāvalī by Rūpa Gosvāmī - Śrīkṛṣṇasya Mahimā

श्रीपद्यावली

श्रील रूप गोस्वामी द्वारा संकलित
Śrī Padyāvalī complied by Śrīla Rūpa Gosvāmī

श्रीकृष्णस्य महिमा
Śrīkṛṣṇasya Mahimā

श्लोक ६ (छन्द : शार्दूलविक्रीड़ितम )
अम्बोधिः स्थलतां स्थलं जलधितां धुलीलवः शैलातां 
शीलो मृतकणतां तृणां कुलिश्तां वज्रं तृणाक्षीणतां। 
वह्निः शीतलतां हिमं दहनतायामिति यस्येच्छया 
लीला-दुर्ललिताद्भुत-व्यसनीने कृष्णाय तस्मै नमः।  

अनुवाद
जिनकी इच्छा शक्ति से समुद्र स्थल और स्थल समुद्र बन जाता है, धूलिकण पर्वत और पर्वत धूलिकण, तृण वज्र और वज्र तृण से भी बलहीन, अग्नि शीतल एवं परम शीतल हिम भी अग्नि भाव को प्राप्त हो जाता है, अतएव जिनकी लीला शक्ति अज्ञेय है, इस प्रकार अद्भुत अचिन्त्य  गुणों से परिपूर्ण कृष्ण को हमारा नमन। 

Verse 6 (meter : śārdūlavikrīr̤itama)
ambodhiḥ sathalatāṃ sthalaṃ jaladhitāṃ dhulīlavaḥ śailātāṃ 
śīlo mṛtakaṇatāṃ tṛṇāṃ kuliśtāṃ vajraṃ tṛṇākṣīṇatāṃ. 
vahniḥ śītalatāṃ himaṃ dahanatāyāmiti yasyecchayā 
līlā-durlalitādbhuta-vyasanīne kṛṣṇāya tasmai namaḥ.

Translation

श्लोक ७ 

Verse 7 (meter : śārdūlavikrīr̤itama)

Translation

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